Kartik Purnima का पौराणिक और धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। यह दिन धर्म, दान और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि जब देवता स्वयं पृथ्वी पर अवतरित होकर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, तब समस्त ब्रह्मांड में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है।
पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था और ब्रह्मा जी द्वारा सृजित वेदों की रक्षा की थी। वहीं शिवभक्तों के लिए यह दिन त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से प्रसिद्ध है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसी कारण इसे देव दीपावली यानी देवताओं की दीपावली कहा जाता है।
इसी दिन देवताओं और मनुष्यों के लोक के बीच की सीमाएँ पतली हो जाती हैं, इसलिए प्रार्थना, साधना और दीपदान का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस रात में जलाए गए प्रत्येक दीपक से न केवल अंधकार मिटता है, बल्कि व्यक्ति के कर्मों और ग्रहों की नकारात्मकता भी शांत होती है। इसीलिए यह दिन धार्मिक उत्थान और ज्योतिषीय संतुलन दोनों के लिए परम श्रेष्ठ माना गया है।
“इस पूर्णिमा को ब्रह्मांड का वह क्षण माना जाता है जब प्रकाश, भक्ति और ग्रहों की ऊर्जा एक साथ मिलकर मानव चेतना को जाग्रत करती हैं।”
भगवान विष्णु और भगवान शिव से जुड़ी कथाएँ
इस पावन दिन को वैष्णव परंपरा में श्रीहरि विष्णु की आराधना का सर्वोत्तम अवसर माना गया है। भगवान विष्णु को तिल, दीप और तुलसी अर्पित करने से संपत्ति, सुख और मोक्ष तीनों प्राप्त होते हैं।
दूसरी ओर, भगवान शिव के भक्तों के लिए यह दिन विशेष रूप से शक्तिदायक है। कहा गया है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि में जब त्रिपुरासुर का अंत हुआ, तब समस्त देवगणों ने दीप जलाकर आनंद मनाया। इसी परंपरा से दीपदान की शुरुआत हुई।
ज्योतिषीय दृष्टि से कार्तिक पूर्णिमा का प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार, Kartik Purnima की रात्रि में चन्द्रमा वृषभ राशि में उच्च के भाव में होता है, और उसकी किरणें पृथ्वी पर शीतलता और मानसिक शांति का संचार करती हैं।
इस दिन राहु और केतु जैसे छाया ग्रहों का प्रभाव न्यूनतम होता है, इसलिए साधना और ध्यान के लिए यह रात सर्वोत्तम मानी जाती है।
जब चन्द्रमा अपनी पूर्णता पर होता है, तब मन, भावना और अंतर्ज्ञान की शक्ति भी चरम पर होती है। यही कारण है कि इस रात में किए गए जप, ध्यान और संकल्प का फल कई गुना बढ़ जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से यह भी माना गया है कि Kartik Purnima के दिन यदि व्यक्ति अपने चन्द्र दोष या कालसर्प योग से मुक्ति चाहता है, तो दीपदान और दान से ग्रहों का संतुलन स्थापित होता है।
गंगा स्नान और दीपदान का आध्यात्मिक रहस्य
Kartik Purnima पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। प्रातःकाल में किया गया स्नान शरीर, मन और आत्मा – तीनों की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
पवित्र नदियों में दीप प्रवाहित करना केवल परंपरा नहीं बल्कि ऊर्जा का विनियमन है — जब दीप जलता है, तो वह व्यक्ति की नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक तरंगों को जाग्रत करता है।
ज्योतिष शास्त्र कहता है कि जल तत्व चन्द्रमा से जुड़ा है, और जब चन्द्र पूर्ण होता है तो जल की तरंगे अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। ऐसे में दीपदान से व्यक्ति का मन स्थिर और ग्रहों का प्रभाव संतुलित होता है।
देव दीपावली : जब देवता उतरते हैं पृथ्वी पर
वाराणसी, हरिद्वार, उज्जैन और पुष्कर जैसे तीर्थस्थलों पर इस दिन का दृश्य स्वर्ग समान होता है। गंगा तट पर लाखों दीप जलते हैं, और उनके प्रतिबिंब जल में झिलमिलाते हैं — मानो देवता स्वयं उतर आए हों।
कहा जाता है कि इस दिन यदि कोई व्यक्ति गंगा आरती के दर्शन करता है, तो उसके सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होती है।
चन्द्रमा, नक्षत्र और ग्रहों की विशेष स्थिति
2025 की Kartik Purnima पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। यह नक्षत्र स्वयं चन्द्र देव से संबंधित है और सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है।
2025 की Kartik Purnima पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। यह नक्षत्र स्वयं चन्द्र देव से संबंधित है और सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है।
चन्द्रमा और रोहिणी का यह मेल भावनात्मक स्थिरता, मानसिक स्पष्टता और रिश्तों में प्रेम बढ़ाने का संकेत देता है।
ज्योतिष के अनुसार, इस समय शुक्र और गुरु दोनों शुभ स्थिति में रहेंगे, जिससे धार्मिक कार्यों, ध्यान और विवाह जैसे संस्कारों के लिए यह समय सर्वोत्तम होगा।
Kartik Purnima के दिन किए जाने वाले शुभ कर्म और उपाय
प्रातःकाल गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
गाय, ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें — जैसे वस्त्र, भोजन या दीपक।
रात्रि में शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक करें।
घर में 11 दीपक जलाकर दिशाओं में रखें, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
आधुनिक जीवन में Kartik Purnima का संदेश
तेज़ रफ्तार जीवन में Kartik Purnima हमें यह याद दिलाती है कि सच्चा प्रकाश बाहर नहीं, हमारे भीतर का चेतन दीप है।
यह पर्व हमें सिखाता है कि यदि मन शुद्ध है तो जीवन की हर दिशा आलोकित हो जाती है।
इस दिन का ज्योतिषीय संदेश यही है —
“जब चन्द्र पूर्ण हो, तब अपने भीतर के अंधकार को पहचानो और उसे प्रेम, ज्ञान और क्षमा के प्रकाश से भर दो।”
निष्कर्ष : आत्मा के उजाले से संसार को प्रकाशित करो
Kartik Purnima केवल एक तिथि नहीं, यह आध्यात्मिक उत्थान का क्षण है। यह दिन मनुष्य और ब्रह्मांड के बीच एक अदृश्य पुल बनाता है, जहाँ ग्रहों की लय और आत्मा की शुद्धता एक हो जाती है।
चाहे आप Delhi, des Moines , Dublin , Agra, Venzhou में हों या Shanghai में — इस कार्तिक पूर्णिमा पर एक दीप जलाइए, और अपने भीतर कहिए —
“अंधकार मेरा नहीं, बस मेरा प्रकाश जगाने का समय आ गया है।”
Kartik Purnima के लेखक— राजीव सरस्वत
राजीव सरस्वत एक प्रसिद्ध ज्योतिष लेखक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं, जो वैदिक ज्योतिष को आधुनिक सोच और मानवीय भावनाओं के साथ जोड़ते हैं।
उनका उद्देश्य है कि हर पाठक ग्रहों, अंकों और संकेतों के माध्यम से अपने जीवन की दिशा को बेहतर समझ सके।
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